भारतीय भाषा कार्यक्रम, सीएसडीएस द्वारा आयोजित
प्रतिमान-व्याख्यान शृंखला में आपका स्वागत है
शब्द और समय
वक्ता : अशोक वाजपेयी
अध्यक्षता : रविकान्त
22 नवम्बर 2021, चार बजे
विषय-सार: शब्द और समय का संबंध द्वंद्वात्मक है : कभी शब्द समय को बदलने की चेष्टा करते हैं, कभी समय शब्द को। यों भाषा मनुष्य का एकमात्र संभव अनंत है। पर समय के प्रवाह में कुछ शब्द, कुछ भाषाएँ लुप्त हो जाती हैं : कई बार शब्द अपनी अक्षरता का प्रमाण देते हुए फिर किसी नये रूप में प्रगट होते हैं। कवि-लेखक कई बार किसी अभिप्राय या अनुभव या प्रतीति को सूक्ष्मता से व्यक्त-विन्यस्त करने के लिए नये शब्द गढ़ते हैं। ऐसा साधारण लोग भी अपने रोज़मर्रा के जीवन में अप्रत्याशित रूप से करते हैं। शब्दगाथा और समयगाथा में गहरा संबंध है। कोई भाषा तभी तक जीवंत और सर्जनात्मक रहती है जब तक उसमें नये शब्द रचने और ग्रहण करने की संभावना रहती है।
अशोक वाजपेयी, कवि, चिंतक, संस्थान-निर्माता हैं.
रविकान्त सीएसडीएस में एसोसिएट प्रोफ़ेसर हैं.