Pratiman Volume 15 Available Free Online

Pratiman, Volume 15, January-June 2020 (Click to Read)

अनुक्रम (Click to Read Article)

सम्पादकीय : एक ऐतिहासिक संकट, उसके   विविध आयाम, और राजनीतिक विरोधाभास

सामयिकी-1 : कोरोना के इर्द-गिर्द कुछ असमाप्य गद्य /मदन सोनी

सामयिकी-2 : भय की महामारी /प्रमोद रंजन

स्मरण : रेणु की राजनीति /प्रेम कुमार मणि

बहस के लिए : भाषा परिवार और सभ्यता का नस्ली सिद्धांत /अभय कुमार दुबे

स्मृति-शेष : उपन्यासकार की मृत्यु : निरंतर प्रवासी कृष्ण बलदेव वैद  / उदयन वाजपेयी

विशेष लेख : महाभारत और सौंदर्यशास्त्र की चरम अनुभूति यथार्थ का अतिक्रमण : प्राचीन और आधुनिक आख्यानों का अंतर / सुदीप्त कविराज / अनुवाद : नरेश गोस्वामी

आईना : प्राच्यवाद, प्राच्यविद्या और वि-उपनिवेशीकरण  /राधावल्लभ त्रिपाठी

परिप्रेक्ष्य : आदिवासियों के बीच दलित : वंचना का एक और संसार /कमल नयन चौबे

अनुशासन : पत्रिका-पाठ वाया सुधा /विजय झा

समीक्षा-संवाद / हिंदू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति पर एकाग्र

बहुसंख्यवाद विरोधी संघर्ष की चुनौतियाँ / आदित्य निगम

बहुसंख्यवाद विरोधी विमर्श की आंतरिक आलोचना / नरेश गोस्वामी

समीक्षा

हिंसक समय में अहिंसा-विमर्श / आलोक टण्डन

भविष्य के महानायक या ‘एक असम्भव सम्भावना /आलोक टण्डन

चुनाव आयोग, मतदाता और लोकतांत्रिक अनिश्चितता /कुँवर प्रांजल सिंह

कई तरह के संवाद /रुचि श्री

दृश्य-संस्कृति के बहाने सभ्यता-विमर्श / संत समीर

औपनिवेशिक भारत और प्रतिबंधित साहित्य /आशुतोष कुमार

दलितों में भी दलित : बात से बात /अजय कुमार

नये नेतृत्व की तलाश में दलित / अरविंद कुमार

संधान

फ़िल्म पत्रकारिता का आदिकाल : चित्रपट की मिसाल /रविकान्त

आदर्श हिंदू स्त्री : हिंदी नवजागरण से गीता प्रेस तक /चारु सिंह

‘रोटी साट्टा’ का समाजशास्त्र : मारवाड़ के समाज में स्त्री-दासता का एक रूप /कैलाश रानी चौधरी

औपनिवेशिक भारत में हिंदी का विज्ञान-लेखन : अनूप प्रकास /शुभनीत कौशिक

अठारहवीं सदी में राजनीति और धर्म और शस्त्रधारी संन्यासियों का संसार /सुकेश लोहार

किताबें मिलीं /मनोज मोहन

रचनाकार-परिचय और सम्पर्क / प्रतिमान के लिए संदर्भ-साँचा