हिंदू धर्म : एक पुनर्कल्पना

हिंदू धर्म को सनातन धर्म भी कहा जाता है। लेकिन सनातनता के इस दावे के बावजूद इस धर्म में समय के साथ कई बदलाव हुए हैं। दूसरी तरफ़, इसके दार्शनिक और संरचनागत आयामों में एक नैरंतर्य भी कायम रहा है। अरविंद शर्मा का यह व्याख्यान हमें परिवर्तन की इस प्रक्रिया से आगाह करता है। साथ ही यह उस संभावित दिशा की तरफ़ भी इशारा करता है जिस तरफ़ परिवर्तन की यह प्रक्रिया इस धर्म को ले जा सकती थी (और अभी भी ले जा सकती है), बशर्ते हिंदू परम्परा को पश्चिमी विचार-श्रेणियों के हस्तक्षेप से न गुज़रना पड़ता। इस लिहाज़ से इस व्याख्यान में धर्म और जाति सरीखी कई संबंधित अवधारणाओं पर ग़ौर किया गया है।

धर्म-अध्ययन के विद्वान और मैक्गिल युनिवर्सिटी में बर्क्स प्रोफ़ेसर अरविंद शर्मा अवर रिलीजंस, विमेन इन वर्ल्ड रिलीजंस, फ़ेमिनिज़म इन वर्ल्ड रिलीजंस और द रूलर्स गेज़ : अ स्टडी ऑफ़ ब्रिटिश रूल ओवर इंडिया फ़्रॉम अ सईदियन पर्सपेक्टिव और हिंदुइज़्म एज़ अ मिशनरी रिलीजन  जैसी बहुचर्चित और बहुपठित कृतियों के लिए जाने जाते हैं। उनकी पुस्तकों के दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं।

अध्यक्षता

आदित्य निगम विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएस) में प्रोफ़ेसर और प्रतिमान समय समाज संस्कृति  के संपादक मंडल के सदस्य हैं।

सोमवार, 24 फ़रवरी, 2020
शाम पाँच बजे, सीएसडीएस सेमिनार रूम
29, राजपुर रोड, दिल्ली