Pratiman Volume 17-18 (yearly) Available Free Online

Volume- Sanyuktank 17-18, January-December 2021 (Click to Read)

अनुक्रम (Click to Read Article)

संपादकीय 

यह 'विरासत' अंक और आगे की राह

आज़ादी का अमृत महोत्सव

जयपाल सिंह मुंडा और आदिवासी राजनीति / कमल नयन चौबे 

राजराजेश्वरी : राजभक्ति, हिंदी लोकवृत्त और महारानी विक्टोरिया / शुभनीत कौशिक

राजा तथा अरूप-रतन : नाटक एक, संस्करण अनेक रबींद्रनाथ के आध्यात्मिक नाटक / शरद देशपाण्डे | अनुवाद : बलराम शुक्ल

हेट स्पीच, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भारतीय क़ानूनी व्यवस्था / निशांत कुमार

उत्तर भारत की प्रवास संस्कृति और गिरमिटिया मज़दूर / आशुतोष कुमार

साहित्य और अस्मिता विमर्श 

अश्वेत स्त्री-आत्मकथाएँ : जेंडर और समाज के आईने में / गरिमा श्रीवास्तव

मराठी और हिंदी दलित कहानियों में मानवाधिकारों के प्रश्न /अजमेर सिंह काजल

भाषा में स्त्री और स्त्री की भाषा-2 / रवींद्र कुमार पाठक

पटाक्षेप नहीं :  लिली रे और मैथिली साहित्य का समाजशास्त्र /देव नाथ पाठक

विविध संधान 

गुमशुदा व्यक्तियों के परिवारों की आवश्यकताएँ एवं चुनौतियाँ / प्रदीप बौहरे, अयूब ख़ान

फिर महानंदा बेसिन : बाढ़, बाँध व राज्यनीति / पंकज कुमार झा, दिनेश कुमार मिश्र

हाशिए का अध्ययन : गुजरात की समुद्री मछुआरिनें /सुबोध कुमार

समीक्षा लेख 

ओशो : हाशिए पर मुखपृष्ठ / राजेश कुमार चौरसिया

उत्तर भारत में नदी प्रदूषण और शहरीकरण का हालिया इतिहास-लेखन / विकास कुमार

समीक्षा

पंजाबी साम्यवाद और अंतरराष्ट्रीयता / धीरज कुमार नाइट

साहित्य को इतिहास बनाने की कमज़ोर कोशिश / वेंकटेश कुमार

मुक्तिकामी ज्ञान की खोज / शशांक चतुर्वेदी

नदी-निषाद के सापेक्ष समाज और इतिहास-लेखन / रुचि श्री

भविष्य के प्रतिरोध / पुनीत कुमार

किताबें मिलीं / मनोज मोहन

रचनाकार-परिचय और संपर्क

प्रतिमान के लिए संदर्भ-साँचा