Pratiman Volume 14 Available Free Online

Pratiman, Volume 14, July-December 2019 (Click to Read)

अनुक्रम (Click to Read Article)

सम्पादकीय : अर्थव्यवस्था का संकट और  उसके सामाजिक-राजनीतिक फलितार्थ

पाठक-संवाद : उपनिवेशित और उपनिवेशक के बीच  एक जटिल मुठभेड़ : पुनर्वसु जोशी

सामयिकी  

कश्मीर : सरकारी विमर्श बनाम गाँधी, आम्बेडकर और लोहिया /उर्मिलेश

परिसंवाद : आर्थिक संकट पर एकाग्र आर्थिक सुस्ती या पस्ती? : वैकासिक मॉडल के फलितार्थों से फ़ौरी / ग़लतियों तक/ अरुण कुमार, देविंदर शर्मा, टी.के. अरुण, /अनिल शर्मा और आदित्य निगम

प्रतिलेखन : कंचन शर्मा

परिप्रेक्ष्य : हर्नांदो डि सोटो और वित्तीय समावेशन का असली चेहरा /आदित्य निगम

गाँधी 150 पर विशेष : हिंसक आर्थिकी का प्रतिरोध : मशीन को उसके उचित स्थान पर बैठाना /नंदकिशोर आचार्य

विशेष लेख  : आदिवासी जीवन और वनवासी कल्याण आश्रम /कमल नयन चौबे

दृष्टि : विज्ञान, विज्ञान-शिक्षा और समानता : दार्शनिक बहसों के हवाले से कुछ प्रश्न /लल्लन बघेल

परिप्रेक्ष्य : अनवरत शांति और धर्मयुद्ध / अशोक वोहरा

संस्मरण

हिंदी का अजनबी इलाक़ा / शीला संधू

मेरी अंग्रेज़ी की कहानी / सतीश देशपाण्डे दोनों अनुवाद / नरेश गोस्वामी

समीक्षा-संवाद

क्या है बदलते देहात की ‘तीसरी चीज़’ / मोहिंदर सिंह

नयी ग्रामीण सामाजिकता : शक्ति-केंद्रों की पहचान / नरेश गोस्वामी

समीक्षा

भारोपीय भाषा परिवार, हिंदी और उत्तर-औपनिवेशिकता / उदय शंकर

भारतीय पुलिस : उम्मीदों और अभावों के बीच /कमल नयन चौबे

लोकतंत्र के मद्देनज़र समाज की सदाएँ /कुँवर प्रांजल सिंह

अंग्रेज़ों का शासन और ग्रामीण पंजाब का रूपांतरण /सनी कुमार

संधान

चुप्पियाँ और दरारें : मुसलमान स्त्रियों की आत्मकथाएँ /गरिमा श्रीवास्तव

यौन हिंसा और भारतीय राज्य : विसंगतियों के आईने में /पूजा बख़्शी

अनुबंधित श्रमिक : प्रवास और औपनिवेशिक नीति /आशुतोष कुमार

बंजारा समाज : सभ्य नागरिक से अपराधी जाति की ओर /जितेंद्र सिंह

राजपूत और मुग़ल : संबंधों का आकलन देशज इतिहासकारों की दृष्टि में /विक्रम सिंह अमरावत

ड्राइंग आफ़्टर : कार्टून, विभाजन और महिलाएँ /नासिफ़ मुहम्मद अली / अनुवाद : सुधा तिवारी

कुछ कहें, कुछ करें : सामुदायिक मीडिया  और सामाजिक परिवर्तन /फ़ैज़ उल्लाह

किताबें मिली /मनोज मोहन

रचनाकार-परिचय और सम्पर्क / प्रतिमान  के लिए संदर्भ-साँचा