Pratiman Volume 11 Available Free Online

Pratiman, Volume 11, January-June 2018 (Click to Read)

अनुक्रम (Click to Read Article)

सम्पादकीय : ज्ञानोत्पादन और भारतीय

भाषाएँ : संस्थागत रक्ताल्पता  

दृष्टि

अंधकारमयता का अन्वेषण : ग्रीको-युरोपियन ज्ञानोदय के स्थानांतरण की समस्या / नवज्योति सिंह

अनुवाद : विक्रम भारद्वाज

सामयिकी 

चुनाव-शास्त्र और राजनीति : कुछ शुरुआती नोट्स / योगेश अटल

झूठ, छल और अंधकार केंद्र सरकार का आख़िरी बजट : आम आदमी को क्या मिला? / नीरज जैन

अनुवाद ः सुनील कुमार

प्रतिमान-व्याख्यान

भ्रष्टाचार-उन्मूलन की संस्थागत राजनीति / अमिताभ राजन

परिप्रेक्ष्य  

घटती ग़रीबी, बढ़ती तकलीफ़ें : ग़रीबों के जीवन का एक समाजशास्त्रीय चित्र / देवेश विजय

आईना

कौतुक के पर्वत का सैलानी : लुडविग विट्गेन्स्टाइन की दुनिया / प्रसन्न कुमार चौधरी

बीच बहस में

शिक्षा : संकट, चुनौतियाँ और अवसर / सतीश देशपांडे, पूनम बत्रा, अतुल कोठारी, नीरज जैन और सतेंद्र कुमार 

संयोजन और प्रतिलेखन : कंचन शर्मा

समीक्षा

हिंदी में ट्रैक्टेटस : एक और पुनर्जन्म / प्रसन्न कुमार चौधरी

ब्रिटिश भारतीय सेना का राष्ट्रवाद? / सनी कुमार

सामुदायिक पुनरुत्थानवाद और इतिहास-लेखन / निर्मल कुमार पाण्डेय

अहिंसक श्रम : आर्थिक प्रक्रिया से सांस्कृतिक मूल्यबोध तक का सफ़र / आलोक  टंडन

सूत की दुनिया / आशुतोष कुमार

विशेष लेख

हिंदुस्तानी आदमी घर में : तब— और अब? / ज्ञानेंद्र पाण्डे

संधान

मध्यकालीन मारवाड़ में ‘डाकण’ : नारी प्रताड़ना के बदलते स्वरूप / कैलाश रानी

सार्वदेशिकतावाद और हिंदी सिनेमा / स्मृति सुमन

आतंकवाद : यात्रा एक शब्द और अवधारणा की / सनी कुमार

राज्य और धर्म : सूफ़ी विचारधारा और मुक्ति का सवाल / अनंत राम मिश्र

झलक

निःशब्द नूपुर : रूमी की सौ ग़ज़लों का हिंदी अनुवाद / गिरीश्वर मिश्र

स्मृति-शेष

योगेश अटल : एशियाई संदर्भों के समाजशास्त्री / देवेश विजय

सतीश चंद्र : इतिहास में सामासिकता की खोज / नरेश गोस्वामी

केदारनाथ सिंह : तत्सम के पड़ोस में तद्भव / जितेन्द्र श्रीवास्तव

रामकुमार : बँधे-रुँधे यथार्थ के पार कला / प्रयाग शुक्ल

अस्मा जहाँगीर : प्रतिरोध का अनवरत प्रयोग / नरेश गोस्वामी

नवज्योति सिंह : भारतीय चिंतन परम्परा का नया पाठ / अविनाश झा

रचनाकार-परिचय और सम्पर्क

प्रतिमान  के लिए संदर्भ-साँचा