CSDS DigiPAPER Series

CSDS DigiPAPER Series

CSDS offers in the form of an 'occasional paper series' ongoing research work by its faculty.  By calling it DigiPAPERS, we gesture towards a hybridity of form and content suitable to our times. Here we  play more freely with the text and design, as is possible under a digital format, and offer a greater range of hyperlinks, images and audio-visual material, so that readers can readily access the primary and secondary sources available in the public domain.

सीएसडीएस डिजिपर्चा शृंखला

इन तीन डिजिपर्चों के साथ हम बेमियादी अकादमिक पर्चों की एक नई शृंखला शुरू कर रहे हैं। नाम से ही सामग्री के संकर रूपाकार का अंदाज़ा मिल जाएगा। दरअसल हम डिजिटल तकनीक द्वारा मुहैय्या करायी जा रही सुविाधाओं का इस्तेमाल करके ऐसे लेख पेश करना चाहते हैं, जिसमें हर तरह की जड़, चल और रंगीन तस्वीरों, हायपर-कड़ियों और श्रव्य-द्रष्टव्य सामग्री से खेलने की ज़्यादा आज़ादी हो, और पाठकों को मुक्त जनपद में उपलब्ध स्रोत- और विद्वत-सामग्री तक अनायास पहुँच मिल सके। 

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#01: Ravi Vasudevan. In India's Life and Part of It: Film and Visual Publicity at Burmah-Shell from the 1920s to the 1950s


#02: रविकान्त. फ़िल्म पत्रकारिता का आदिकाल: चाँद, चित्रपट और अन्य कहानियाँ

#03: Hilal Ahmed. The Contemporary Moment of Indian Democracy